PESAA HE KYA ?

वक्त नहीं हे मेरे पास जिंदगी को खुल कर जीने का  क्योकि पैसे नहीं हे मुझ पर उड़ाने  को ,माज़िल  को पाना बहुत  मुश्किल सा लगने लगा हे सायद ये भी  पैसे की कमी हे ,और मुझे इंतज़ार हे अपने उस पल का जिस पर जिंदगी को गुमान हों  मुझ पर !

वक़्त ने ऐसा क्या कर दिया की जिस  काम को  हमने कभी  करने की ना सोची व आज  हमे अच्छा  लगने लगा सायद ये  भी  पैसे की कमी हे !

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