short poem

मेने एक दिन पूछ लिया वक़्त से की तू इतना गैर दिल कैसे ह सकता हे की तूने मेरी झोली में कुछ पल हसीन नहीं डाले उसने पलटकर कहा की मुझे तोह तुमने ही बर्बाद किया हे !

मुझे सर्म आती हे अपने इस चरित्र पर की तू इतना काबिल भी ना था की तुझे तेरे क़ाबलियत के हिसाब से किसी ने देखा ही नही  तोह सिर्फ देखा गया तेरे सुणार्पण ,पहचान  से !

Comments

Popular posts from this blog

पिता-पुत्र की कहानी

आत्मनिर्भरता की कहानी

Love with onsite😊